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नवीन आपराधिक कानूनों पर जशपुर में कार्यशाला, त्वरित और पीड़ित-केंद्रित न्याय व्यवस्था पर हुआ मंथन

BNS, BNSS और BSA के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन और फॉरेंसिक अधिकारियों ने साझा किए अनुभव

जशपुरनगर, 13 जून 2026। नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और अनुसंधान अधिकारियों की क्षमता वृद्धि के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक कार्यालय जशपुर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 2023 के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्येन्द्र कुमार साहू, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम देवांगन, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमन सिंह, डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह सहित न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन और फॉरेंसिक विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला में जिले के सभी थाना एवं चौकी प्रभारियों, विवेचकों तथा अभियोजन शाखा के अधिकारियों ने भी भाग लिया।

न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर

कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि पीड़ितों को त्वरित, पारदर्शी और न्यायसंगत न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि नए कानूनों में तकनीक आधारित जांच, समयबद्ध विवेचना और पीड़ितों के अधिकारों को विशेष महत्व दिया गया है।

उन्होंने विवेचकों से नए कानूनों का गहन अध्ययन कर उन्हें व्यवहारिक रूप से लागू करने की अपील करते हुए केस डायरी की गोपनीयता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व पर चर्चा

जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्येन्द्र कुमार साहू ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में एफआईआर का समयबद्ध पंजीयन, घटनास्थल का वैज्ञानिक निरीक्षण और डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित संग्रहण अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मोबाइल डेटा, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया साक्ष्यों के विधिसम्मत उपयोग पर विशेष बल दिया।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और वैज्ञानिक अनुसंधान ही न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाता है तथा पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

गुणवत्तापूर्ण विवेचना से मजबूत होगा अभियोजन

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम देवांगन ने विवेचकों को घटनास्थल संरक्षण, डिजिटल साक्ष्यों के संग्रहण और निष्पक्ष जांच के संबंध में मार्गदर्शन दिया। वहीं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमन सिंह ने केस डायरी के नियमित संधारण, रिपोर्ट की सटीकता और साक्ष्य आधारित विवेचना के महत्व पर प्रकाश डाला।

विभागों के समन्वय से मिलेगा बेहतर परिणाम

कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन और फॉरेंसिक विभागों के बीच बेहतर समन्वय से नवीन आपराधिक कानूनों का उद्देश्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा कि वैज्ञानिक और पारदर्शी विवेचना से आम नागरिकों को त्वरित एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराया जा सकेगा।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित न्यायिक अधिकारियों, अभियोजन अधिकारियों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

Ibnul khan

Editor-in-chief

Jashpur times

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