सरगुजा रेंज के नए प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों से रूबरू हुए आईजी दीपक कुमार झा, दिए व्यवहारिक प्रशिक्षण के महत्वपूर्ण टिप्स
जशपुर सहित छह जिलों में 78 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों की पदस्थापना, कानून व्यवस्था से लेकर साइबर अपराध तक की बारीकियां सीखने पर जोर

अंबिकापुर। सरगुजा रेंज में नवपदस्थ प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को बेहतर पुलिसिंग और व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सरगुजा रेंज श्री दीपक कुमार झा ने 13 जून 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय अंबिकापुर में बैठक एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को थाना और मैदानी क्षेत्रों में प्रभावी कार्यशैली अपनाने तथा जनसेवा की भावना के साथ कार्य करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

पुलिस मुख्यालय छत्तीसगढ़, नवा रायपुर के आदेशानुसार सरगुजा रेंज के विभिन्न जिलों में नए प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों की पदस्थापना की गई है। इनमें सरगुजा जिले में 14, सूरजपुर में 15, बलरामपुर में 16, जशपुर में 13, एमसीबी में 12 तथा कोरिया जिले में 8 प्रशिक्षु उपनिरीक्षक शामिल हैं। इन सभी को मैदानी क्षेत्रों में व्यवहारिक प्रशिक्षण हेतु इकाई स्तर पर पदस्थ किया गया है।
बैठक के दौरान सरगुजा जिले के 14 प्रशिक्षु उपनिरीक्षक प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे, जबकि अन्य जिलों के प्रशिक्षु अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल, सीएसपी अंबिकापुर राहुल बंसल, रक्षित निरीक्षक तृप्ति सिंह राजपूत सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
कानून व्यवस्था से लेकर साइबर अपराध तक की दी जानकारी
आईजी दीपक कुमार झा ने सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों का परिचय प्राप्त कर उनकी शैक्षणिक एवं अन्य योग्यताओं की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली, व्यवहारिक चुनौतियों और मैदानी अनुभवों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को कानून व्यवस्था, अपराध विवेचना, साइबर फ्रॉड, सीसीटीएनएस संचालन, बीट पुलिसिंग, संतरी ड्यूटी, न्यायालयीन कार्यवाही, मुलजिम पेशी, कोर्ट मोहर्रिर कार्य, समन-वारंट तामिली, गुम इंसान प्रकरण, मर्ग जांच तथा महिला एवं बाल अपराधों से संबंधित मामलों का गंभीरता से अध्ययन करने की सलाह दी।
जनता के प्रति संवेदनशील व्यवहार पर दिया विशेष जोर
आईजी झा ने कहा कि एक पुलिस अधिकारी की पहचान केवल उसकी कार्रवाई से नहीं बल्कि उसके व्यवहार से भी होती है। उन्होंने पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता, महिलाओं एवं बच्चों से जुड़े मामलों में विशेष सतर्कता, मानवाधिकारों के सम्मान तथा पुलिस की सकारात्मक छवि निर्माण पर विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण अवधि में अनुशासन, समयपालन, वर्दी की गरिमा तथा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन अत्यंत आवश्यक है। प्रशिक्षु अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करना चाहिए।
जनसेवा और अपराध नियंत्रण में निभानी होगी प्रभावी भूमिका
बैठक के अंत में आईजी दीपक कुमार झा ने कहा कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ऐसे सक्षम और जिम्मेदार पुलिस अधिकारी तैयार करना है, जो कानून व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण विवेचना और जनसेवा के क्षेत्र में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
उन्होंने सभी प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण अवधि का अधिकतम लाभ उठाने और अनुभवों से सीखकर एक आदर्श पुलिस अधिकारी बनने का संदेश दिया।
Ibnul khan
Editor-in- chief
jashpur times







