जनआंदोलन के आगे झुकी कंपनी, जशपुर में नहीं लगेगा पावर–स्टील प्लांट
हरीयली की जीत काँसाबेल टाँगर गाव मे प्लांट लगाने से पीछे हटी कंपनी | Ground Report
BREKING NEWS – टांगर गांव (कांसाबेल), जशपुर | जशपुर टाइम्स
जशपुर जैसे हरियाली से भरे आदिवासी जिले में प्रस्तावित पावर और स्टील प्लांट न केवल पर्यावरण, बल्कि यहां के जनजीवन, जल-जंगल-जमीन के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकते थे। इसी आशंका के चलते कांसाबेल विकासखंड अंतर्गत टांगर गांव में प्रस्तावित मां कुदरगढ़ी स्टील/पावर प्रोजेक्ट का ग्रामवासियों सहित जिलेभर के लोगों ने जोरदार विरोध किया।यह विरोध केवल एक गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जिलेभर के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्थानीय नागरिकों और राजपरिवार से जुड़े लोगों ने भी स्पष्ट रूप से इस परियोजना के पक्ष में न होने की बात कही।

जनसुनवाई तक स्थगित, आंदोलन की अगुवाई में गणेश राम भगत
इस जनआंदोलन की अगुवाई पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं जनजातीय सुरक्षा मंच के प्रमुख, वरिष्ठ आदिवासी नेता गणेश राम भगत ने की। उनके नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के चलते उस समय प्रस्तावित जनसुनवाई को स्थगित करना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि उस समय प्रदेश में कांग्रेस की भूपेश सरकार थी, लेकिन इसके बावजूद जिले में सर्वदलीय और सर्वसमाज की एकजुटता इस प्रोजेक्ट के खिलाफ देखने को मिली।
जशपुर की हरियाली सभी के लिए महत्वपूर्ण
जशपुर को प्रदेशभर में “ग्रीन पार्क” के नाम से जाना जाता है। यहां की हरियाली, जंगल और कृषि आधारित जीवनशैली जशपुरवासियों के लिए केवल संसाधन नहीं, बल्कि पहचान है। यही कारण रहा कि इस प्लांट के विरोध में राजनीति से ऊपर उठकर एक सामूहिक आवाज़ सामने आई।
टांगर गांव की महिलाओं की भूमिका रही सराहनीय
इस आंदोलन में टांगर गांव की महिलाओं की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उन्होंने एकजुट होकर पावर प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध किया। महिलाओं की यह एकता और संगठन ग्रामीण आंदोलन को मजबूती देने वाला साबित हुआ और पूरे जिले में इसकी सराहना हुई।
कंपनी ने माना दबाव, प्लांट कहीं और शिफ्ट करने का निर्णय
लगातार विरोध, भूमि पर रोक और सामाजिक दबाव के बाद कंपनी प्रतिनिधियों ने ग्रामवासियों के बीच यह स्पष्ट किया कि वे अब जशपुर में प्लांट नहीं लगाएंगे और परियोजना को कहीं और शिफ्ट करेंगे।
ग्रामवासियों ने मां कुदरगढ़ी स्टील की सैकड़ों एकड़ भूमि पर किसी भी प्रकार की औद्योगिक गतिविधि, बाउंड्री निर्माण या बाहरी हस्तक्षेप पर रोक लगा दी थी, जिससे कंपनी को बैकफुट पर आना पड़ा।
खेती गांव वाले करेंगे, सख्त शर्तों पर सहमति
कंपनी द्वारा यह प्रस्ताव रखा गया कि खरीदी गई भूमि पर खेती करने की अनुमति दी जाए। इस पर ग्रामसभा में चर्चा के बाद यह तय हुआ कि—
खेती केवल गांव के लोग करेंगे
बाहरी व्यक्तियों को खेती की अनुमति नहीं होगी
मुनाफे में मां कुदरगढ़ी स्टील की भागीदारी होगी, लेकिन नियंत्रण ग्रामवासियों का रहेगा
फिलहाल टला प्लांट का संकट
वर्तमान स्थिति में जशपुर जिले के लिए प्लांट का खतरा टल चुका है। कंपनी प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों के समक्ष दोहराया कि यहां किसी भी परिस्थिति में प्लांट नहीं लगाया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा जशपुर जैसे जिले के लिए आवश्यक ही नहीं, बल्कि भविष्य की अनिवार्यता है।यह सिर्फ एक गांव नहीं, हरियाली की जीतकुल मिलाकर यह संघर्ष ग्रामवासियों की जीत, एकता की जीत और सबसे बढ़कर जशपुर की हरियाली की जीत है। टांगर गांव से उठा यह आंदोलन आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मजबूत उदाहरण के रूप में याद रखा जाएगा।
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ibnul khan
adiror-in-chif
जशपुर टाइम्स – सच सब तक







