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आस्था के साथ सुविधा: केशलापाठ देव स्थल में सड़क, मंच और सौंदर्यीकरण की सौगात

छेरछेरा के उल्लास में इतिहास जीवित—केशलापाठ पहाड़ पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

जशपुरनगर | 04 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और आस्था का प्रतीक पर्व छेरछेरा एक बार फिर इतिहास और विश्वास को जोड़ता नज़र आया। इसी पावन अवसर पर पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम तमता में स्थित केशलापाठ पहाड़ पर तीन दिवसीय ऐतिहासिक मेले का विधिवत शुभारंभ हुआ।पौष पूर्णिमा की सुबह, जब श्रद्धा अपने चरम पर थी, तब जिले के कलेक्टर रोहित व्यास ने आस्था की परीक्षा देते हुए 300 से अधिक सीढ़ियाँ चढ़कर पहाड़ की चोटी पर स्थित देव स्थल में दर्शन किए। देव स्थल में मत्था टेककर उन्होंने पूरे जिले की खुशहाली, शांति और समृद्धि की कामना की।


             

विकास की सौगात लेकर पहुँचा प्रशासन

मेले में उमड़े हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट संदेश दिया कि
आस्था के साथ-साथ सुविधाएँ भी ज़रूरी हैं।

  • देव स्थल तक पहुँच को आसान बनाने के लिए पक्की सड़क निर्माण का कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा

  • श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु सामुदायिक शौचालय को स्वीकृति मिल चुकी है

  • विधायक निधि से प्रस्तावित मंच निर्माण अगले वर्ष तक पूर्ण किया जाएगा

  • वन विभाग के सहयोग से पूरे परिसर के सौंदर्यीकरण की समग्र योजना पर कार्य किया जा रहा है


जहाँ पौराणिक कथा आज भी जीवित है

केशलापाठ देव स्थल केवल एक पहाड़ नहीं, बल्कि आस्था और इतिहास का संगम है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थल पर पांडव पुत्र भीम ने बकासुर नामक राक्षस का वध कर क्षेत्र को आतंक से मुक्त कराया था। तभी से यह स्थान देव भूमि के रूप में पूजित है।

यहाँ स्थित प्राचीन कुंड श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है, जिसमें वर्षभर जल बना रहता है। मान्यता है कि कुंड में स्नान कर दर्शन करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु नारियल अर्पित करते हैं।


परंपरा, प्रशासन और जनभागीदारी

छेरछेरा के दूसरे दिन से प्रारंभ होने वाला यह मेला तीन दिनों तक चलता है, जिसमें जशपुर सहित आसपास के जिलों से भी लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। कलेक्टर ने व्यापारियों और श्रद्धालुओं से शांति, अनुशासन और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी, ग्राम प्रतिनिधि, आयोजन समिति के सदस्य और हजारों ग्रामीणजन उपस्थित रहे। यह मेला केवल उत्सव नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर बन गया है।

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ibnul khan 

aditor-in-chief

jashpur times – सच सब तक        

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